नई दिल्ली। श्रद्धा वॉल्कर हत्याकांड को चार साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इस चर्चित मामले में अब तक अंतिम फैसला नहीं आया है। मई 2022 में सामने आए इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। पुलिस के मुताबिक, श्रद्धा की हत्या के बाद उसके शव के टुकड़े किए गए और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर फेंका गया। मामले में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला जेल में है और दिल्ली की अदालत में ट्रायल जारी है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि श्रद्धा को न्याय कब मिलेगा। उनके पिता विकास वॉल्कर बेटी को इंसाफ मिलता देख नहीं सके। 2025 में उनके निधन के बाद अब श्रद्धा का भाई कानूनी लड़ाई आगे बढ़ा रहा है।
डेटिंग ऐप से शुरू हुई थी मुलाकात
श्रद्धा वॉल्कर महाराष्ट्र के मलाड इलाके में कॉल सेंटर में काम करती थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात आफताब अमीन पूनावाला से हुई। दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया।
परिवार की असहमति के बावजूद श्रद्धा वर्ष 2019 में आफताब के साथ रहने चली गईं। दोनों दिल्ली के महरौली इलाके में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। समय के साथ दोनों के बीच विवाद बढ़ने की बात सामने आई।
18 मई 2022 को हुई हत्या
पुलिस की जांच के अनुसार, 18 मई 2022 को श्रद्धा की हत्या की गई। पुलिस का आरोप है कि हत्या के बाद शव के कई टुकड़े किए गए और उन्हें एक बड़े फ्रिज में रखा गया। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर अलग-अलग स्थानों पर शव के अवशेषों को ठिकाने लगाया।
मामले का खुलासा कई महीने बाद हुआ। श्रद्धा के पिता द्वारा गुमशुदगी की शिकायत किए जाने और जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेन-देन तथा अन्य जांच के आधार पर आफताब को नवंबर 2022 में गिरफ्तार किया।
जांच के दौरान जंगल से मिले मानव अवशेषों का DNA श्रद्धा के परिवार के DNA से मैच होने की बात पुलिस ने कही थी।
6,600 पन्नों से अधिक की चार्जशीट
दिल्ली पुलिस ने जनवरी 2023 में साकेत कोर्ट में 6,600 पन्नों से अधिक की चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद अदालत ने आरोपी के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने से संबंधित धाराओं में आरोप तय किए।
मामले में बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और ट्रायल लगातार आगे बढ़ रहा है। अब तक इस मामले में 200 से अधिक गवाहों को पुलिस की ओर से पेश किए जाने की बात सामने आई है।
ट्रायल में तेजी की मांग पर हाईकोर्ट ने डेडलाइन तय करने से किया इनकार
श्रद्धा के भाई ने ट्रायल जल्द पूरा कराने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। 31 जुलाई 2026 को मामले पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ट्रायल पूरा करने के लिए अलग से कोई निश्चित समय-सीमा तय करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने माना कि साकेत की ट्रायल कोर्ट मामले को गंभीरता से ले रही है और कार्यवाही जारी है। साथ ही विदेशी गवाहों की जरूरत पड़ने पर उनकी गवाही में तेजी लाने के लिए संबंधित मंत्रालयों के स्तर पर सहयोग का निर्देश दिया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जुलाई 2026 में अदालत की विभिन्न कार्यवाहियों और आदेशों का रिकॉर्ड उपलब्ध है।
परीक्षा देने की अनुमति पर भी विवाद
आरोपी आफताब के जेल से पढ़ाई और परीक्षा देने के मामले ने भी चर्चा पैदा की है। रिपोर्टों के मुताबिक, उसने जेल से IGNOU के माध्यम से MA Sociology की पढ़ाई और परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मांगी थी।
इस मामले में यह समझना जरूरी है कि भारतीय कानून के तहत किसी व्यक्ति को दोष सिद्ध होने तक आरोपी या अंडरट्रायल माना जाता है। जेल में बंद कैदियों को निर्धारित नियमों के तहत शिक्षा और परीक्षा जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं। हालांकि, पीड़ित परिवार की ओर से यह सवाल उठाया गया है कि ऐसी गतिविधियों के कारण ट्रायल में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
श्रद्धा की बुआ ने संदिग्ध कॉल का दावा किया
श्रद्धा की बुआ राजल नाइक ने हाल ही में दावा किया कि मीडिया में न्याय में देरी का मुद्दा उठाने के बाद उन्हें पाकिस्तान से कथित तौर पर अनजान अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन आने लगे हैं।
उनका कहना है कि परिवार इन कॉल्स को लेकर चिंतित है और उन्होंने कथित कॉल्स के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखे हैं। उन्होंने पुलिस से शिकायत कर जांच कराने की बात कही है।
हालांकि, इन कॉल्स के पीछे कौन है और क्या उनका इस मामले से कोई संबंध है, यह जांच का विषय है। केवल फोन कॉल के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
पिता के बाद भाई लड़ रहा कानूनी लड़ाई
श्रद्धा के पिता विकास वॉल्कर ने बेटी की मौत के बाद लंबे समय तक न्याय की लड़ाई लड़ी। वर्ष 2025 में उनके निधन के बाद अब श्रद्धा का भाई इस मामले में कानूनी लड़ाई आगे बढ़ा रहा है।
परिवार की सबसे बड़ी चिंता मुकदमे के लंबे समय तक चलने को लेकर है। उनका कहना है कि चार साल बीत जाने के बाद भी अंतिम फैसला नहीं आया है।
श्रद्धा का अंतिम संस्कार भी अब तक नहीं
मामले का एक भावनात्मक पहलू यह भी है कि जांच के दौरान बरामद किए गए कथित मानव अवशेष और हड्डियां कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। परिवार की ओर से यह कहा गया है कि इन अवशेषों के कारण श्रद्धा का अंतिम संस्कार अब तक नहीं हो सका है।
चार साल बाद भी एक ही सवाल—कब मिलेगा इंसाफ?
श्रद्धा वॉल्कर हत्याकांड ने प्रेम, विश्वास, घरेलू हिंसा और रिश्तों में बढ़ती हिंसा को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी थी। लेकिन चार साल बाद भी मामला अदालत में विचाराधीन है।
आरोपी आफताब अमीन पूनावाला पर गंभीर आरोप हैं, लेकिन अदालत का अंतिम फैसला अभी बाकी है। ऐसे में श्रद्धा का परिवार अब न्यायालय से जल्द और निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद कर रहा है।
नोट: यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आरोपी को दोषी ठहराए जाने तक उसे कानूनन निर्दोष माना जाता है। अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।





