(CG ई ख़बर — सरस्वती मरकाम, दर्री रिपोर्टर)
छुईहापारा (कोरबा)। ग्राम छुईहापारा के किसान मनहरण पिता धरमू ने अपनी पैतृक भूमि पर तैयार खड़ी धान की फसल को लेकर एसडीएम के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया है। मनहरण का कहना है कि खसरा नंबर 16/1, रकबा 0.7650 हेक्टेयर भूमि लगभग 70–80 साल पुराने बंटवारे के अनुसार उनके परिवार की वैध संपत्ति है तथा 1998–99 से अब तक राजस्व रिकॉर्ड में निरंतर उनके नाम पर दर्ज है।
वहीं दूसरी ओर, राम शाय के पुत्र शिव कुमार जाटवर इस भूमि को लेकर आपत्ति पेश कर रहे हैं। मनहरण के अनुसार यह दावा पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन है, क्योंकि बी-1, बी-2 तथा ऑनलाइन–ऑफलाइन सभी राजस्व रिकॉर्ड उनके नाम पर मौजूद हैं।
किसान मनहरण ने बताया कि धान की बोवाई, खाद–बीज की खरीद, सिंचाई और संपूर्ण मेहनत उसी ने की है और संबंधित बिल व प्रमाण भी कोर्ट में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। वहीं उनका सवाल साफ है—
“जमीन मेरी, दस्तावेज मेरे, खेती मैंने की — तो धान कोई और कैसे ले?”
अब सबकी निगाह एसडीएम कोर्ट पर
ग्राम में इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। ग्रामीणों का कहना है कि अब देखने वाली बात यह है कि एसडीएम साहब किस पक्ष के पक्ष में निर्णय सुनाते हैं —
वैध दस्तावेज़ और मेहनत करने वाले किसान मनहरण के,
या आपत्ति दर्ज कराने वाले दूसरे पक्ष के?
फैसला जो भी होगा, गाँव की निगाहें अब एसडीएम के “आखिरी शब्द” पर टिकी हैं।
सीजी ई ख़बर इस प्रकरण पर आगे भी नजर बनाए रखेगा।


