कोरबा (CG ई खबर | जिला संवाददाता : सत्या पटेल) — कोरबा जिले के शहर के मध्य स्थित घंटाघर मुख्य मार्ग पर पेट्रोल पंप के समीप एक मार्मिक और मानवीय घटना सामने आई, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। यहां मानसिक रूप से अस्वस्थ एक महिला अकेले पैदल भटकती हुई दिखाई दी। इसी दौरान अचानक उसे तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और वह सड़क पर ही तड़पने लगी।
महिला की गंभीर हालत देखकर आसपास मौजूद राहगीरों ने मानवता का परिचय देते हुए तुरंत 102 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी। कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंची एंबुलेंस टीम ने तत्परता दिखाते हुए महिला को जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाना शुरू किया। इसी दौरान रास्ते में ही महिला ने 102 एंबुलेंस वाहन में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
अस्पताल में भर्ती, नवजात SNCU में
अस्पताल पहुंचते ही महिला को सुरक्षित वार्ड में भर्ती कराया गया। वहीं नवजात शिशु की स्थिति को देखते हुए उसे SNCU (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में रखा गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार नवजात पूरी तरह सुरक्षित है और उसका वजन लगभग 3 किलोग्राम है।
परिजनों ने झाड़ा पल्ला
अस्पताल प्रबंधन द्वारा पूछताछ करने पर पता चला कि महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ है और मूल रूप से रायगढ़ जिले की निवासी है। महिला ने अपने पिता का मोबाइल नंबर दिया, जिस पर संपर्क करने पर पिता ने बताया कि उसकी शादी कोरबा में हुई थी और वह पिछले 3–4 वर्षों से घर से लापता है। पिता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब उनका उससे कोई संबंध नहीं है।
इसके बाद महिला के पति से संपर्क किया गया, लेकिन उसने भी महिला और नवजात बच्चे से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार कर दिया।
अस्पताल प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन मां और नवजात की जिम्मेदारी को लेकर असमंजस में है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विभागाध्यक्ष ने बताया कि महिला की उम्र लगभग 28 वर्ष है और वह मानसिक रूप से परेशान है। ऐसे में मां और बच्चे दोनों को विशेष देखभाल की आवश्यकता है।
परिवार और पति द्वारा जिम्मेदारी लेने से इनकार किए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने महिला एवं बाल विकास विभाग को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दे दी है। आगे की वैधानिक और संरक्षण संबंधी प्रक्रिया संबंधित विभाग द्वारा की जा रही है।
मानवता की मिसाल, समाज के लिए सवाल
यह घटना एक ओर जहां 102 एंबुलेंस सेवा और चिकित्सा व्यवस्था की तत्परता को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर अपनों द्वारा छोड़े जाने की पीड़ा और सामाजिक संवेदनहीनता को भी उजागर करती है। मां और नवजात के भविष्य को लेकर अब प्रशासन और समाज की भूमिका अहम हो गई है।


