(CG ई खबर | पिंकी महंत : कटघोरा ब्लॉक संवाददाता)
गेवरा–दीपका/छत्तीसगढ़ : 18 दिसंबर को गुरू घासीदास जी के मानवतावादी विचारों और शिक्षाओं को आत्मसात करने का संकल्प सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया। छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और सतनाम पंथ के अनुयायियों द्वारा सत्य, अहिंसा, समानता और मानवता के मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर शैक्षिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यालयों और महाविद्यालयों में गुरू घासीदास जी के दर्शन पर सेमिनार, वाद-विवाद, भाषण और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित कर विद्यार्थियों को उनके विचारों से जोड़ा गया। शिक्षकों ने बताया कि गुरू घासीदास जी के सिद्धांत आज के समय में सामाजिक सद्भाव और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
समाज में व्यापक संकल्प देखने को मिला, जहां सतनाम पंथ के अनुयायियों के साथ-साथ आम नागरिकों ने सत्य बोलने, अहिंसा का पालन करने, समानता और श्रम की गरिमा को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। कार्यक्रमों में यह संदेश प्रमुख रहा कि सामाजिक भेदभाव और असमानता को समाप्त किए बिना सशक्त समाज का निर्माण संभव नहीं है।
डिजिटल माध्यम से भी प्रसार किया गया। युवाओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घासीदास_विचार और #सतनाम_समर्पण जैसे हैशटैग के माध्यम से गुरू घासीदास जी के संदेशों को व्यापक स्तर पर साझा किया, जिससे नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
सामाजिक एकता पर विशेष बल देते हुए विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि गुरू घासीदास जी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनके सिद्धांत समाज में भाईचारा, सौहार्द और समरसता को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम हैं।
राज्य स्तरीय पहल के अंतर्गत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गुरू घासीदास जी के विचारों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने और उनके स्मारकों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी इस संकल्प आंदोलन को मजबूती देने वाला बताया गया।
उल्लेखनीय है कि गुरू घासीदास (1756–1836) एक महान संत और समाज सुधारक थे, जिन्होंने छत्तीसगढ़ में सतनाम पंथ की स्थापना की। उन्होंने जाति व्यवस्था, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव का विरोध करते हुए मानव मात्र की समानता का संदेश दिया।
कुल मिलाकर, गुरू घासीदास जी के विचारों को आत्मसात करने का यह संकल्प आंदोलन एक नई सामाजिक चेतना का प्रतीक बनकर उभरा है, जिसे सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों की स्थापना की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है।


