खेतों की पगडंडियों से पुलिस की परेड तक: किसान की बेटी साधना यादव बनी छत्तीसगढ़ पुलिस सिपाही

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मैं भी एक दिन पहनूंगी पुलिस की वर्दी — गरीब किसान की बेटी साधना यादव ने रच दिया इतिहास

जांजगीर-चांपा | 10 दिसंबर 2025 (CG ई खबर)
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के जांजगीर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पुटपुरा की रहने वाली साधना यादव ने अपने संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर वह मुकाम हासिल किया है, जो आज पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गया है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मी साधना ने छत्तीसगढ़ पुलिस में सिपाही बनकर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन किया है।

सपनों की शुरुआत

साधना यादव के पिता मेंघराज यादव एक मेहनती किसान हैं, जो खेतों में पसीना बहाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति सीमित थी, लेकिन पिता ने कभी भी बेटी की पढ़ाई में बाधा नहीं आने दी। गांव में जब लोग ताने मारते कि “लड़की को इतना पढ़ाकर क्या करोगे”, तब मेंघराज यादव का जवाब साफ होता था — “मेरी बेटी कुछ बड़ा करेगी।”
साधना बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रही और गांव के स्कूल में हमेशा अच्छे अंक लाती रही।

सपना जो बन गया जुनून

बचपन में जब भी साधना गांव में किसी पुलिसकर्मी को देखती, उसके मन में एक ही ख्याल आता — “मैं भी एक दिन पुलिस की वर्दी पहनूंगी।” समय के साथ यह ख्याल सपना बना और फिर जुनून। हाईस्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद साधना ने पुलिस भर्ती की कठिन तैयारी शुरू की।

संसाधनों की कमी, हौसलों की नहीं

पुलिस भर्ती की प्रक्रिया आसान नहीं होती — लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और मेडिकल टेस्ट। गांव में न कोचिंग थी, न मार्गदर्शन। साधना ने पुराने किताबों, मोबाइल इंटरनेट और परिवार के सहयोग से खुद ही पढ़ाई की।
बिजली की समस्या के कारण कई बार दीये की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ी, लेकिन उम्मीद की लौ कभी बुझने नहीं दी।

मेहनत का कठिन रास्ता

फिजिकल टेस्ट की तैयारी साधना के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। गांव में मैदान नहीं था, इसलिए वह खेतों की पगडंडियों पर दौड़ लगाती। सुबह-शाम घंटों अभ्यास करती। कई बार थकान से गिर भी पड़ी, लेकिन हर बार और मजबूत होकर उठी।

पहली असफलता, फिर नई उड़ान

पहली बार पुलिस भर्ती परीक्षा में साधना फिजिकल टेस्ट पास नहीं कर पाई। तानों की बौछार हुई, लेकिन साधना नहीं टूटी। पिता ने हौसला बढ़ाते हुए कहा — “असफलता ही सफलता की सीढ़ी है।”
इसके बाद साधना ने अपनी कमियों पर काम किया, अभ्यास बढ़ाया और लिखित परीक्षा की तैयारी दोगुनी कर दी।

सपना हुआ साकार

वर्ष 2025 में साधना ने दोबारा परीक्षा दी। इस बार लिखित परीक्षा में अच्छे अंक आए और फिजिकल टेस्ट में भी शानदार प्रदर्शन किया। अंतिम सूची में जब साधना का नाम आया, तो पूरे पुटपुरा गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। पिता मेंघराज यादव की आंखों में खुशी के आंसू थे — “मेरी बेटी ने मेरा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।” मां और भाई-बहनों की आंखें भी खुशी से नम थीं।

गांव के लिए ऐतिहासिक पल

साधना यादव पुटपुरा गांव से पुलिस सेवा में चयनित होने वाली पहली लड़की बनी हैं। उनकी सफलता ने गांव के अन्य युवाओं, खासकर लड़कियों में नया आत्मविश्वास जगाया है।

युवाओं के नाम संदेश

साधना कहती हैं —
“मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। संसाधनों की कमी कभी सपनों की उड़ान नहीं रोक सकती। असफलता से डरने की जरूरत नहीं, वही हमें मजबूत बनाती है।”

आगे की राह

साधना अब पुलिस ट्रेनिंग की तैयारी में जुटी हैं। उनका कहना है कि वे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से वर्दी की गरिमा बनाए रखते हुए अपने गांव, समाज और देश की सेवा करेंगी।

साधना यादव की कहानी आज उन हजारों ग्रामीण बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित साधनों में भी बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं।

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