कोरबा कलेक्टर के लिए बड़ी चुनौती
अवैध रेत, मनरेगा में ‘अंगद’ बने कर्मी और फ्लाई ऐश का संकट
[CG ई ख़बर : विजय चौहान | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ]
कोरबा। कोरबा जिले में नवपदस्थ कलेक्टर कुणाल दुदावत ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण कर लिया है। उनके आगमन के साथ ही आम जनता और प्रशासनिक गलियारों में नई उम्मीदें जगी हैं, लेकिन जिले की जमीनी हकीकत उनके सामने किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
अवैध रेत खनन, मनरेगा में वर्षों से जमे कर्मचारी और फ्लाई ऐश का बेलगाम प्रबंधन—ये तीनों मुद्दे फिलहाल जिले की सबसे गंभीर चुनौतियों के रूप में खड़े हैं।
नदियों का सीना चीरता अवैध रेत खनन
कोरबा जिले में अवैध रेत खनन और परिवहन एक विकराल समस्या बन चुका है। सरकार बदलने के बावजूद रेत माफियाओं के हौसले कम नहीं हुए, बल्कि और अधिक बेखौफ नजर आ रहे हैं। जिले की शायद ही कोई नदी या नाला ऐसा बचा हो, जहां जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टरों से दिन-रात रेत का अवैध दोहन न हो रहा हो।
कभी सरकारी योजनाओं की आड़ में तो कभी निर्माण कार्यों का हवाला देकर बिना रॉयल्टी रेत का बड़े पैमाने पर भंडारण और खुलेआम कालाबाजारी की जा रही है। इसका सीधा असर जलस्तर पर पड़ रहा है और नदियों के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में नए कलेक्टर के लिए रेत माफियाओं पर सख्त कार्रवाई करना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
मनरेगा में वर्षों से जमे ‘अंगद’ बने कर्मचारी
दूसरी बड़ी समस्या मनरेगा विभाग में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारी हैं। कलेक्टर बदलते रहे, लेकिन ये कर्मी अपनी जड़ें और मजबूत करते चले गए। पूर्व कलेक्टर अजीत बसंत के कार्यकाल में कटघोरा क्षेत्र में बड़े घोटालों के उजागर होने पर कुछ कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन जिला और ब्लॉक स्तर पर आज भी कई ऐसे कर्मचारी पदस्थ हैं जो मनरेगा राशि के दुरुपयोग में माहिर माने जाते हैं।
बिना काम कराए फर्जी हितग्राही, फर्जी जियो-टैगिंग और कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर लाखों-करोड़ों रुपये के गबन के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। अक्सर कार्रवाई सिर्फ रोजगार सहायकों तक सीमित रह जाती है, जबकि संगठित रूप से जुड़े बड़े स्तर के अधिकारियों पर हाथ नहीं डाला जाता। यही वजह है कि भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं। मनरेगा ही नहीं, अन्य विभागों में भी वर्षों से जमे कर्मियों का स्थानांतरण अब अनिवार्य हो गया है।
फ्लाई ऐश बना जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
तीसरी और उतनी ही गंभीर चुनौती फ्लाई ऐश से जुड़ी है। इसके परिवहन से लेकर अवैज्ञानिक डंपिंग तक, हर स्तर पर लापरवाही सामने आ रही है। सड़कों के किनारे, रिहायशी इलाकों और यहां तक कि जल स्रोतों के आसपास भी फ्लाई ऐश खुलेआम डंप की जा रही है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
मामले मीडिया में उजागर होने के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा न तो ठोस जांच की जाती है और न ही प्रभावी कार्रवाई। फ्लाई ऐश से गड्ढे पाटने की आड़ में मनरेगा से बने तालाबों और जीवित जलाशयों को पाटे जाने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
अन्य लंबित समस्याएं भी बनी चुनौती
इन तीन प्रमुख मुद्दों के अलावा जिले में सड़क, बिजली, नाली, पेयजल संकट, बढ़ता अतिक्रमण, भू-विस्थापितों का पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार जैसी कई पुरानी समस्याएं भी वर्षों से लंबित हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नवपदस्थ कलेक्टर कुणाल दुदावत इन जटिल और गहरी जड़ों वाली समस्याओं से किस तरह निपटते हैं और क्या वे जिले को अवैध गतिविधियों व भ्रष्टाचार से मुक्ति दिला पाते हैं या नहीं। आने वाले दिन प्रशासन की दिशा और दशा तय करेंगे।


