“जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा” – इंदिरा नगर बस्ती के प्रदर्शनकारी
(CG ई खबर | पिंकी महंत : कटघोरा ब्लॉक संवाददाता)
कोरबा जिले के कुसमुंडा क्षेत्र अंतर्गत इमली छापर बस्ती में रेलवे प्रबंधन द्वारा मकान तोड़ने के नोटिस जारी किए जाने के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। रेलवे कर्मचारियों द्वारा करीब 210 घरों पर निशान लगाकर खाली करने के निर्देश दिए जाने के विरोध में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए, जिससे कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।
ऐसे भड़का विरोध
रेलवे की कार्रवाई के बाद शुक्रवार दोपहर इमली छापर चौक पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्रित हो गए। आक्रोशित लोगों ने मुख्य सड़क को जाम करने का प्रयास किया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों से आम रास्ता अवरुद्ध न करने की अपील की। बाद में दर्री तहसीलदार भी मौके पर पहुंचीं और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की।
तहसीलदार द्वारा रेलवे अधिकारियों और जिला प्रशासन के साथ बैठक कर समाधान निकालने का आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारी सड़क से हटे और स्थिति कुछ हद तक शांत हुई।
पहले भी हो चुका है ऐसा विरोध
इमली छापर की यह घटना कोई एकल मामला नहीं है। इससे पहले भी कोरबा के इंदिरा नगर दुरपा बस्ती में रेलवे की ओर से करीब 250 घरों को नोटिस जारी किए गए थे। उस दौरान आक्रोशित लोगों ने पहले रेलवे स्टेशन का घेराव किया था और अगले दिन पवन टॉकीज के पास करीब तीन घंटे तक जोरदार प्रदर्शन किया था।
प्रभावित लोगों की मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा। प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
- विस्थापन से पहले वैकल्पिक आवास की व्यवस्था
- उचित मुआवजा
- जमीन का स्पष्ट सीमांकन
- पुनर्वास की पूरी और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना
फिलहाल कार्रवाई स्थगित
तहसीलदार के आश्वासन के बाद इमली छापर और इंदिरा नगर दोनों जगहों पर प्रदर्शन फिलहाल समाप्त हो गए हैं। रेलवे की ओर से घर हटाने की कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और नोटिस की समय-सीमा बढ़ा दी गई है। हालांकि, स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
गौरतलब है कि इस क्षेत्र में रेलवे के नोटिस के अलावा एसईसीएल की परियोजनाओं से जुड़े विस्थापन को लेकर भी लंबे समय से आंदोलन चल रहे हैं, जिससे कुसमुंडा क्षेत्र में विस्थापन और पुनर्वास का मुद्दा लगातार गंभीर और जटिल बना हुआ है।


