(CGई खबर | कटघोरा ब्लाॅक संवाददाता : पिंकी महंत)
कोरबा — दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के नवपदस्थ मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) राकेश रंजन ने पदभार संभालने के महज दूसरे ही दिन कोरबा का दौरा कर यह स्पष्ट संकेत दे दिया कि रेलवे विकास कार्यों में गुणवत्ता, गति और जवाबदेही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उनके इस त्वरित और जमीनी निरीक्षण से कोरबा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में नई गति आने की उम्मीद जगी है।
निरीक्षण के प्रमुख बिंदु
डीआरएम रंजन ने दौरे के दौरान स्टेशन परिसर एवं चल रहे निर्माण कार्यों का बारीकी से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।
■ अमृत भारत स्टेशन योजना
- स्थिति: योजना के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी पाई गई।
- निर्देश: निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्यों को शीघ्र पूरा करने और गति बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए।
■ इमलीडुग्गू रेलवे फाटक क्षेत्र
- समस्या: लगभग एक वर्ष से कार्य प्रगति पर है। मानिकपुर कोल साइडिंग एवं प्रस्तावित ओवरब्रिज निर्माण कार्य में बाधा बने हुए हैं।
- निर्देश: इंजीनियरिंग विभाग को इन बाधाओं को ध्यान में रखते हुए ठोस कार्ययोजना तैयार करने तथा रेल संचालन व यात्रियों की सुविधा प्रभावित न हो, इसका विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए।
■ सुरक्षा और यात्री सुविधा पर फोकस
- समस्याएं: अधूरे फुट ओवर ब्रिज (FOB), सुरक्षा दीवार की कमी एवं प्लेटफॉर्म पर बिखरी निर्माण सामग्री।
- निर्देश: सभी अधूरे कार्य शीघ्र पूर्ण करने, प्लेटफॉर्म को स्वच्छ, सुरक्षित और यात्री-अनुकूल बनाने के आदेश दिए गए।
■ कोयला ढुलाई और स्टाफ संवाद
- चर्चा: लगातार बढ़ते कोल डिस्पैच के दबाव से राहत के उपायों पर मंथन किया गया।
- कर्मचारी संवाद: डीआरएम ने स्टेशन की क्रू लॉबी पहुंचकर रनिंग स्टाफ से सीधी बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी।
गेवरारोड स्टेशन का भी निरीक्षण
डीआरएम रंजन ने गेवरारोड स्टेशन का निरीक्षण करते हुए स्टेशन परिसर और कोल साइडिंग का जायजा लिया। साथ ही पेंड्रारोड रेल कॉरिडोर से भविष्य में जोड़ने की योजनाओं पर अधिकारियों के साथ चर्चा की।
स्थानीय प्रतिक्रिया भी सामने आई
डीआरएम का यह दौरा जहां सकारात्मक पहल माना जा रहा है, वहीं रेल संघर्ष समिति, कोरबा ने इस पर आपत्ति जताई है। समिति के संयोजक रामकिशन अग्रवाल ने कहा कि दौरे की जानकारी गोपनीय रखी गई, जिससे यात्री संगठनों को अपनी समस्याएं रखने का अवसर नहीं मिल सका। समिति का प्रतिनिधिमंडल डीआरएम से मिलकर यात्री हितों पर चर्चा करना चाहता था।
निष्कर्ष
डीआरएम राकेश रंजन का यह सक्रिय और त्वरित दौरा कोरबा रेलवे विकास के प्रति गंभीर, व्यावहारिक और कर्मठ सोच को दर्शाता है। अमृत भारत योजना के कार्यों में तेजी, सुरक्षा मानकों की सख्ती और कर्मचारियों से सीधा संवाद — ये सभी पहलें आने वाले समय में कोरबा रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं में ठोस सुधार का संकेत देती हैं।
हालांकि, भविष्य में ऐसे दौरों में जनप्रतिनिधियों और यात्री संगठनों की भागीदारी बेहतर समन्वय की दिशा में अहम साबित हो सकती है।



