आरएसएस-भाजपा के पुतले दहन, चौक पर गूंजे नारी सुरक्षा के नारे
(CG ई खबर | कटघोरा ब्लॉक संवाददाता : पिंकी महंत)
टी.पी. नगर, उन्नाव।
उन्नाव गैंगरेप मामले की पीड़िता को शीघ्र न्याय दिलाने की मांग को लेकर शनिवार को जिला युवा कांग्रेस ने टी.पी. नगर स्थित चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने आरएसएस और भाजपा पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए दोनों संगठनों के पुतले दहन किए।
काले कपड़ों में उतरे कार्यकर्ता, सरकार के खिलाफ आक्रोश
प्रदर्शन में शामिल युवा कांग्रेस कार्यकर्ता काले कपड़े पहनकर हाथों में तख्तियां लेकर चौक पर एकत्र हुए। तख्तियों पर
“नारी सुरक्षा का ढोंग, भाजपा सरकार धत्त तेरे की सोंग”,
“उन्नाव पीड़िता को तुरंत न्याय दो”
और “आरएसएस-भाजपा महिला विरोधी मानसिकता बंद करो”
जैसे नारे लिखे थे।
कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकार और प्रशासन पर पीड़िता के साथ अन्याय और भेदभाव करने के गंभीर आरोप लगाए।
युवा कांग्रेस नेताओं के तीखे बयान
जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष विनीत पांडेय ने कहा—
“उन्नाव का मामला भाजपा सरकार की कथित महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की सच्चाई उजागर करता है। जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिलेगा, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”
वहीं युवा कांग्रेस की नेत्री प्रियंका शुक्ला ने कहा—
“सरकार आरोपियों को बचाने में जुटी है, लेकिन युवा कांग्रेस पीड़िता की आवाज बनकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।”
पुलिस की मौजूदगी, हल्का लाठीचार्ज
प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुतला दहन के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। हालांकि इस दौरान किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
भाजपा की प्रतिक्रिया
प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा जिला प्रवक्ता सुनील वर्मा ने कहा—
“कांग्रेस का यह प्रदर्शन केवल राजनीतिक हताशा का परिणाम है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है, न्यायपालिका पर भरोसा रखा जाना चाहिए।”
उन्नाव मामला बना सियासी केंद्र
उन्नाव गैंगरेप मामला लंबे समय से राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। युवा कांग्रेस का आरोप है कि सत्ताधारी दल के दबाव में मामले को कमजोर किया जा रहा है और गवाहों पर दबाव डाला जा रहा है, जिससे पीड़िता को न्याय मिलने में बाधा आ रही है।
राजनीतिक असर
इस प्रदर्शन के बाद उन्नाव मामला एक बार फिर स्थानीय राजनीति का अहम मुद्दा बन गया है। विपक्षी दल इसे महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की विफलता के रूप में उठा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है।


