मौत को मात… ‘पापा बचाओ’ की करुण पुकार सुन नहर में डूब रही युवती को युवकों ने बचाया

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(CG ई खबर | दर्री ब्लॉक रिपोर्टर : सरस्वती मरकाम)

खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में बुधवार को मानवता और साहस की एक मिसाल देखने को मिली, जब दो युवकों ने अद्भुत हिम्मत और सूझबूझ दिखाते हुए 25 फीट गहरी ओंकारेश्वर परियोजना की मुख्य नहर में डूब रही एक युवती की जान बचा ली। यह घटना बड़वाह थाना क्षेत्र अंतर्गत खंडवा रोड स्थित आम पंचवटी होटल के पास की है। युवकों के इस साहसिक कारनामे का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोग उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवती नहर में गिरने के बाद तेज बहाव से बचने के लिए बबूल की कांटेदार झाड़ी को पकड़कर खुद को संभालने की कोशिश कर रही थी। वह घबराहट में लगातार ‘पापा बचाओ, पापा बचाओ…’ चिल्ला रही थी। उसी दौरान वहां से गुजर रहे दो युवक—दीपेश चौहान और सुजल बेलगोटिया—ने उसकी आवाज सुनी और बिना समय गंवाए नहर की ओर दौड़ पड़े। नहर की गहराई और तेज बहाव देखकर भी दोनों पीछे नहीं हटे।

बताया गया कि दोनों युवक आरओ वॉटर केन बांटने का काम करते हैं और रोज की तरह लोडिंग वाहन से पानी सप्लाई पर निकले थे। मौके पर न तो कोई रस्सी उपलब्ध थी और न ही मदद के लिए कोई अन्य साधन। ऐसे में उन्होंने तुरंत अपनी सूझबूझ से स्वेटर और हुडी उतारकर आपस में बांध दी और एक अस्थायी रस्सी तैयार की। रस्सी का एक सिरा सुजल ने मजबूती से पकड़ा, जबकि दूसरा सिरा थामकर दीपेश तेज बहाव वाली नहर में उतर गए।

काफी मशक्कत के बाद दीपेश ने युवती का हाथ पकड़ा और सुजल की मदद से उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाहर आते ही युवती बदहवास होकर जमीन पर लेट गई। कांटेदार बबूल पकड़ने के कारण उसके हाथों से खून बह रहा था और मुंह से सफेद झाग भी निकल रहा था। वह इतनी घबराई हुई थी कि अपना नाम और पता तक नहीं बता पा रही थी।

दोनों युवकों ने बिना देर किए युवती को बड़वाह के सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार कर उसकी हालत स्थिर बताई। चिकित्सकों के अनुसार समय पर रेस्क्यू नहीं होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस भी मौके पर पहुंची। युवकों के साहस की हर ओर प्रशंसा हो रही है। स्थानीय नागरिकों ने दीपेश चौहान और सुजल बेलगोटिया को “सच्चा हीरो” बताते हुए उनके सम्मान की मांग की है। यह घटना साबित करती है कि संकट के समय इंसानियत और हिम्मत मिल जाए तो मौत को भी मात दी जा सकती है।

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