छत्तीसगढ़ में जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही
कोरबा (CG ई खबर | जिला संवाददाता : सत्या पटेल) —
छत्तीसगढ़ में बीजापुर जिला अस्पताल के बहुचर्चित आंख फोड़वा कांड की दर्दनाक यादें अभी लोगों के जेहन से उतरी भी नहीं थीं कि कोरबा जिले से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आ गया है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद एक बुजुर्ग महिला की आंख में गंभीर संक्रमण फैल गया, जिससे उसकी आंखों की रोशनी चली गई। इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, कोरबा–चांपा मुख्य मार्ग स्थित ग्राम बरपाली निवासी बद्रिका बाई (60 वर्ष) पिछले चार वर्षों से आंखों की कमजोरी से पीड़ित थीं। 1 दिसंबर को वे अपने पति कौशल दास वैष्णव के साथ मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा के नेत्र रोग विभाग पहुंचीं। जांच के बाद डॉक्टरों ने मोतियाबिंद की पुष्टि करते हुए दाहिनी आंख के ऑपरेशन की सलाह दी।
3 दिसंबर को महिला का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दूसरे दिन जब आंख की पट्टी खोली गई, तो बद्रिका बाई को कुछ भी दिखाई नहीं दिया। उन्होंने तत्काल डॉक्टरों और परिजनों को इसकी जानकारी दी। डॉक्टरों द्वारा स्थिति सामान्य होने का आश्वासन दिया गया, लेकिन आंखों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
हालत बिगड़ने पर महिला को रायपुर रेफर किया गया, जहां एक निजी अस्पताल में तीन दिनों तक इलाज चला, लेकिन वहां भी कोई लाभ नहीं मिला। इसके बाद रायपुर के डॉक्टरों ने मरीज को वापस मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा भेज दिया। यहां महिला को जनरल वार्ड (महिला), बेड नंबर 31 में भर्ती कर इलाज किया गया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। अंततः एक बार फिर महिला को रायपुर रेफर कर दिया गया है।
पीड़िता के पति कौशल दास वैष्णव ने बताया,
“हमने इस उम्मीद से ऑपरेशन कराया था कि पत्नी फिर से ठीक से देख सकेगी, लेकिन अब उसकी आंखों की रोशनी ही चली गई। रायपुर और कोरबा के बीच लगातार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मानसिक तनाव के साथ आर्थिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।”
परिजनों ने आरोप लगाया है कि नियमों को दरकिनार करते हुए बुजुर्ग महिला को संजीवनी एक्सप्रेस से रायपुर भेजा गया और सरकारी अस्पताल के बजाय श्री रेटिना केयर सुपरस्पेशलिटी आई हॉस्पिटल, रायपुर में भर्ती कराया गया, जो पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी कोरबा जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करतला से लापरवाही का मामला सामने आ चुका है, जहां नसबंदी के बाद सुनीता दास नामक महिला की तबीयत बिगड़ गई थी और उसे सरकारी अस्पताल के बजाय एक डॉक्टर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप से महिला की जान तो बच गई, लेकिन आज तक उसे विभागीय सहायता राशि नहीं मिल पाई है।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने छत्तीसगढ़ की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है और पीड़िता को न्याय मिल पाता है या नहीं।


