ग्रामीणों का कहना है कि एसईसीएल परियोजना के कारण उनकी पैतृक भूमि और आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ा है, लेकिन लंबे समय से पुनर्वास, उचित मुआवजा और प्रभावित परिवारों को रोजगार देने के वादे पूरे नहीं किए गए। बार-बार मांग उठाने के बावजूद समाधान न होने से नाराज ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण ढंग से खदान बंद कर अपना विरोध जताया।
खदान बंदी की जानकारी मिलते ही एसईसीएल प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की। लंबी चर्चा के बाद प्रबंधन ने समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल का आश्वासन दिया। इस दौरान 18 दिसंबर 2025 (गुरुवार) को एसईसीएल प्रबंधन, प्रभावित ग्रामीणों के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों की त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित करने पर सहमति बनी।
प्रस्तावित बैठक में पुनर्वास की लंबित बसाहट, मुआवजा वितरण में पारदर्शिता और प्रभावितों के लिए स्थायी एवं वैकल्पिक रोजगार के अवसरों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। आश्वासन और वार्ता की तिथि तय होने के बाद ग्रामीणों ने दोपहर करीब 2 बजे आंदोलन समाप्त कर दिया, जिसके पश्चात खदानों का संचालन पुनः शुरू हो सका।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि 18 दिसंबर को होने वाली त्रिपक्षीय वार्ता में उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का स्थायी और संतोषजनक समाधान निकलेगा।


