SECL कुसमुंडा प्रबंधन के झूठे आश्वासनों से त्रस्त भूविस्थापित महिलाएं

CG.ई ख़बर



1 दिसंबर से मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के गेट पर करेंगी अनिश्चितकालीन घेराव

कुसमुंडा//कोरबा :-
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित भूविस्थापित महिलाओं ने रोजगार, बसाहट तथा अन्य लंबित मांगों को लेकर कंपनी और जिला प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ एक निर्णायक आंदोलन का ऐलान किया है। महिलाएं 1 दिसंबर 2025 से SECL कुसमुंडा के मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के दोनों मुख्य द्वारों को जाम कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगी।

इस आंदोलन का नेतृत्व गोमती केवट, काजल, इन्दुरा, सरिता टिकैतराम बिंझवार, पूनम और मीना कंवर सहित कई भूविस्थापित महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। उनका कहना है कि वे वर्षों से सिर्फ आश्वासन सुन रही हैं, समाधान नहीं।


आक्रोश क्यों?

भूविस्थापित महिलाओं ने बताया कि 17 नवंबर 2025 को उन्होंने SECL कार्यालय के बाहर गेट जाम आंदोलन किया था। उस दौरान दर्री तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर 21 नवंबर 2025 को बैठक कर सभी समस्याओं का समाधान कराने का लिखित आश्वासन दिया था।
लेकिन नियत तिथि पर न तो बैठक हुई और न ही किसी प्रकार का समाधान प्रस्तुत किया गया।

महिलाओं के अनुसार—
“हम गेट जाम, खदान बंद और अफसरों के चक्कर लगाते-लगाते थक चुके हैं। 21 नवंबर की बैठक का आश्वासन भी एक छलावा निकला। अब जब तक ठोस समाधान नहीं किया जाएगा, हम गेट नहीं छोड़ेंगे।”


मुख्य मांगें

1️⃣ पात्र भूविस्थापित परिवारों को तत्काल रोजगार दिया जाए।
2️⃣ सम्मानजनक एवं समुचित बसाहट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
3️⃣ सभी लंबित मांगों का समयबद्ध निराकरण किया जाए।


मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन घेराव

भूविस्थापित महिलाओं ने कहा कि यह आंदोलन SECL और जिला प्रशासन की उदासीनता और संवेदनहीनता के खिलाफ अंतिम लड़ाई है।
उन्होंने चेतावनी दी—
“यदि आंदोलन के दौरान कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है या कोयला उत्पादन बाधित होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी SECL प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी।”


📌 CG ई खबर इस आंदोलन से जुड़े हर अपडेट को प्राथमिकता से प्रसारित करेगा।

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