धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनाक्षी सिन्हा की प्रतिक्रिया, Gen Z से बोलीं—‘मैं आर्टिस्ट हूं, लेकिन असली आर्ट Gen Z है’

CG.ई ख़बर


एंटरटेनमेंट डेस्क।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन और Gen Z की भूमिका को लेकर बॉलीवुड से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर युवाओं के आंदोलन की सराहना की और मजाकिया अंदाज में Gen Z से माफी भी मांगी। वहीं, अभिनेत्री आलिया भट्ट और फैशन डिजाइनर मसाबा गुप्ता ने भी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं और छात्रों के संघर्ष की तारीफ की।

धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया। यह फैसला NEET-UG समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों और राजनीतिक दबाव के बीच आया। जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में उनका इस्तीफा प्रमुख मांगों में शामिल था। इस्तीफे के बाद आंदोलन वापस लेने की घोषणा की गई।

सोनाक्षी सिन्हा ने मांगी माफी

सोनाक्षी सिन्हा ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में Gen Z की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने युवाओं को पहले कम आंका था। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई और कहा कि अब वह Gen Z को कभी कम नहीं आंकेंगी।

सोनाक्षी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, “मैं एक आर्टिस्ट हूं, लेकिन असली आर्ट Gen Z है।” उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। अभिनेत्री इससे पहले भी छात्र आंदोलनों और सामाजिक मुद्दों पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करती रही हैं।

आंदोलन के समर्थन में पहले भी बोल चुकी हैं सोनाक्षी

रिपोर्टों के अनुसार, सोनाक्षी सिन्हा ने छात्र आंदोलन से जुड़े घटनाक्रमों पर पहले भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने सोनम वांगचुक के अनशन और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए थे।

आलिया भट्ट और मसाबा गुप्ता ने भी की Gen Z की तारीफ

सोनाक्षी के अलावा अभिनेत्री आलिया भट्ट और फैशन डिजाइनर मसाबा गुप्ता ने भी सोशल मीडिया पर Gen Z और छात्रों के संघर्ष की सराहना की। दोनों ने युवाओं की दृढ़ता और आंदोलन के प्रति उनके जज्बे को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन और Gen Z की भूमिका को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, छात्रों की चिंताओं और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

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