CG ई खबर डॉनेट

Ads-Google

मेमन बूट हाउस के सामने सड़क बनी हादसों का गढ़, जिम्मेदार कौन? PWD से जिला प्रशासन तक उठ रहे सवाल


सड़कें बदहाल हैं, हादसों का सिलसिला जारी है,
फिर भी जिम्मेदारों की खामोशी भारी है।
वोट लेकर सत्ता में पहुंचना आसान तो है,
मगर जनता की जान बचाना ही असली जिम्मेदारी है।
हादसा होने के बाद मुआयना नहीं चाहिए,
जनता को सुरक्षित सड़क चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए।

(CG ई खबर | दर्री ब्लॉक रिपोर्टर : सरस्वती मरकाम)

कोरबा/दर्री। दर्री क्षेत्र में मेमन बूट हाउस के सामने मेन रोड इन दिनों आम नागरिकों के लिए लगातार चिंता का कारण बनती जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की खराब स्थिति और यातायात व्यवस्था में कमी के चलते यहां आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद नगर निगम, PWD और जिला प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान के लिए ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की स्थिति को लेकर लंबे समय से शिकायतें और मांगें उठती रही हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। सवाल यह है कि आखिर किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों किया जा रहा है?

मंत्री और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर सवाल

कोरबा जिले से ही प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन आते हैं। वहीं कोरबा नगर निगम की महापौर संजू सिंह राजपूत हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि शहर और जिले की महत्वपूर्ण सड़कों की बदहाल स्थिति पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और विभागों का ध्यान कब जाएगा?

प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार है और केंद्र में भी भाजपा की सरकार है। इसके बावजूद यदि किसी प्रमुख मार्ग पर लगातार दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है और सड़क व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है, तो इसकी जवाबदेही आखिर किसकी है?

PWD और प्रशासन से जवाब मांग रही जनता

सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े विभाग PWD, नगर निगम तथा जिला प्रशासन से अब जनता स्पष्ट जवाब चाहती है।

  • सड़क की वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार विभाग कौन है?
  • सड़क निर्माण या मरम्मत का कार्य कब और किस योजना के तहत हुआ?
  • सड़क की गुणवत्ता की जांच कब की गई?
  • यदि सड़क में खामियां हैं तो संबंधित ठेकेदार या जिम्मेदार अधिकारी पर क्या कार्रवाई हुई?
  • दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रशासन ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए?
  • सड़क को सुरक्षित बनाने का स्थायी समाधान कब तक होगा?

इन सवालों का जवाब देना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सड़क पर होने वाली लापरवाही का खामियाजा किसी अधिकारी या नेता को नहीं, बल्कि आम नागरिक और वाहन चालकों को भुगतना पड़ता है।

विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत पर सवाल

सरकार विकास और बेहतर बुनियादी सुविधाओं की बात करती है, लेकिन यदि शहर की प्रमुख सड़कें ही सुरक्षित नहीं हैं तो विकास के इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

जनता यह भी जानना चाहती है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के नाम पर खर्च होने वाली सरकारी राशि का सही उपयोग हो रहा है या नहीं। यदि कहीं सड़क निर्माण में लापरवाही, भ्रष्टाचार या गुणवत्ता से समझौता हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?

यह किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का विषय नहीं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा और उसके अधिकार का सवाल है।

अब जरूरत बयानबाजी की नहीं, बल्कि मौके पर निरीक्षण, सड़क सुधार, यातायात सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने की है। प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किए बिना तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

जनता की आवाज

“सड़क आपकी जिम्मेदारी है, हादसा हमारी मजबूरी क्यों?”

जनता का सवाल सीधा है—जब सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधि सभी मौजूद हैं, तो फिर दर्री की इस सड़क की बदहाली का जिम्मेदार कौन है?

Top Post Ad

Below Post Ad

Ads


ads