(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)
कोरबा। जिले में जनहित के मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय रहने वाले एक पत्रकार ने विभागीय निर्माण कार्यों से जुड़ी जानकारी सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगने के बाद खुद को धमकी दिए जाने का आरोप लगाया है। पत्रकार का कहना है कि उन्होंने अपने प्रमुख के निर्देश पर एक विभाग के निर्माण कार्यों से संबंधित अलग-अलग जानकारियां मांगी थीं, लेकिन विभाग से पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद उन्होंने प्रथम अपील भी की, जिसकी एक सुनवाई हो चुकी है।
पत्रकार के अनुसार, RTI के माध्यम से जानकारी मांगने के बाद विभाग के एसडीओ सहित कुछ लोगों द्वारा लगातार समझौता करने और जानकारी नहीं लेने का दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें किसी प्रकार का समझौता नहीं चाहिए, बल्कि सिर्फ मांगी गई जानकारी चाहिए।
रेस्ट हाउस में बुलाकर दबाव बनाने का आरोप
पत्रकार ने बताया कि बुधवार रात कुछ लोगों ने उनसे मुलाकात की और बातचीत के लिए एक रेस्ट हाउस आने का आग्रह किया। देर रात होने के कारण उन्होंने पहले मना किया, लेकिन बार-बार आग्रह करने पर वे वहां पहुंच गए। उनका आरोप है कि रेस्ट हाउस में विभाग से जुड़े कुछ ठेकेदार, एसडीओ सहित अन्य लोग मौजूद थे।
पत्रकार के मुताबिक, वहां मौजूद एक ठेकेदार ने उनसे सवाल किया कि क्या RTI पैसे उगाही के लिए लगाई गई है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि RTI लगाने का उद्देश्य केवल निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति और संभावित अनियमितताओं की जानकारी प्राप्त करना है, ताकि समाचार के माध्यम से जनता तक तथ्य पहुंचाए जा सकें।
अधिकारी पर धमकी देने का आरोप
पत्रकार का आरोप है कि मौके पर मौजूद एक अधिकारी ने कथित रूप से कहा कि सभी विभागों में ऐसा चलता है और यदि उनके खिलाफ कार्रवाई या दबाव बनाया गया तो वे भी जवाब देने में सक्षम हैं। पत्रकार के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्हें एक कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, लेकिन देर रात होने और दस्तावेज की जानकारी नहीं होने के कारण उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रक्रिया करनी है तो वह कार्यालय समय में विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में की जाएगी। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर एक ठेकेदार ने उन्हें धमकी दी और कहा कि उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
पत्रकार ने जताई सुरक्षा को लेकर चिंता
पत्रकार का कहना है कि उस समय वे अकेले थे, जबकि सामने कई लोग मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें डराने और RTI वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। हालांकि उन्होंने किसी भी तरह का समझौता करने से इनकार कर दिया।
फिलहाल पत्रकार ने संबंधित ठेकेदार और अन्य लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। उनका कहना है कि घटना के बाद वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और उन्हें आशंका है कि उनके साथ कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
जांच के बाद ही होगा खुलासा
इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कथित धमकी किसी व्यक्ति विशेष के इशारे पर दी गई या नहीं। लेकिन यदि किसी पत्रकार को जनहित से जुड़े मुद्दों पर जानकारी मांगने के कारण दबाव या धमकी का सामना करना पड़ता है, तो यह पत्रकारों की सुरक्षा और सूचना के अधिकार के प्रभावी उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
(नोट: इस मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद खबर को अपडेट किया जा सकता है।)

