जांजगीर-चांपा। मुलमुला थाना क्षेत्र में रिमांड पर भेजे जाने से पहले पुलिस कस्टडी में रखे गए एक आरोपी के फरार होने से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। वहीं मामले में एक आरक्षक को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि आरोपी पुलिस कस्टडी में था और उसे न्यायालय में पेश कर रिमांड पर भेजने की प्रक्रिया की जानी थी। इसी दौरान वह पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर फरार हो गया। घटना सामने आते ही थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
पांच पुलिसकर्मियों की ड्यूटी, कार्रवाई सिर्फ एक पर?
सूत्रों के मुताबिक, जिस समय आरोपी पुलिस कस्टडी से फरार हुआ, उस दौरान मौके पर करीब पांच पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी थी। इसके बावजूद अब तक एक आरक्षक के खिलाफ ही निलंबन की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि आरोपी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से पुलिसकर्मियों की थी, तो कार्रवाई केवल एक कर्मचारी तक सीमित क्यों रही?
घटना ने पुलिस थानों में आरोपियों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आखिर पुलिस अभिरक्षा में रखा गया आरोपी थाने से कैसे फरार हो गया? क्या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक हुई थी? और यदि हुई थी तो इसकी पूरी जिम्मेदारी किसकी है?
मुलमुला थाने की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर मुलमुला थाना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में पुलिस की कार्रवाई प्रभावित होती है और कई मामलों में शिकायतकर्ताओं तथा कथित रूप से निर्दोष लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है। पुलिस विभाग से अपेक्षा है कि आरोपी के फरार होने की घटना की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ थाना स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
बड़ा सवाल: जब पुलिस कस्टडी में मौजूद आरोपी ही थाना परिसर से फरार हो जाए, तो आम नागरिक पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा कैसे करे? अब निगाहें इस बात पर हैं कि फरार आरोपी कब तक पकड़ा जाता है और मामले में अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।


