रायपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र के कई महीने बीत जाने के बाद भी विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों की पूरी उपलब्धता नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नई किताबों से भरा एक ट्रक कबाड़ी के गोदाम में उतारते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
वायरल वीडियो में दिखाई दे रही कुछ पुस्तकों पर समग्र शिक्षा का उल्लेख नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि ये सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के वितरण के लिए निर्धारित पुस्तकें हैं। यदि वायरल वीडियो में दिखाई जा रही पुस्तकें वास्तव में सरकारी वितरण के लिए थीं और उन्हें कबाड़ी के यहां पहुंचाया गया है, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मामला हो सकता है।
कई स्कूलों में किताबें नहीं पहुंचने की शिकायत
इधर, प्रदेश के विभिन्न जिलों से विद्यार्थियों को हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान सहित अलग-अलग विषयों की पाठ्यपुस्तकें समय पर नहीं मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई विद्यालयों में विद्यार्थियों को फोटोकॉपी, पुराने संस्करण की पुस्तकों या ब्लैकबोर्ड के माध्यम से पढ़ाई कराने की स्थिति बनने की बात कही जा रही है।
ऐसे समय में नई पुस्तकों से भरा ट्रक कबाड़ी के गोदाम में पहुंचने का वीडियो सामने आने से सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकारी पुस्तकों की सप्लाई और वितरण व्यवस्था में कहीं गंभीर चूक तो नहीं हुई।
वायरल वीडियो की लोकेशन की आधिकारिक पुष्टि नहीं
हालांकि, वायरल वीडियो की वास्तविक लोकेशन की फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में दिखाई दे रहे ट्रक पर उत्तर प्रदेश का पंजीयन नंबर नजर आ रहा है। लेकिन केवल वाहन के नंबर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि वीडियो उत्तर प्रदेश या छत्तीसगढ़ का ही है, क्योंकि मालवाहक वाहनों का दूसरे राज्यों में आवागमन सामान्य है और कई वाहन ऑल इंडिया परमिट के तहत संचालित होते हैं।
इसलिए वीडियो की सत्यता, स्थान और उसमें दिखाई दे रही पुस्तकों की वास्तविक पहचान की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों और अभिभावकों का कहना है कि यदि वीडियो वास्तविक है और उसमें दिखाई दे रही किताबें सरकारी वितरण के लिए थीं, तो मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि—
- किताबें किस गोदाम या संस्था से निकली थीं?
- उनका परिवहन किसके निर्देश पर किया गया?
- पुस्तकें कबाड़ी के गोदाम तक कैसे पहुंचीं?
- ट्रक में लदी पुस्तकों का रिकॉर्ड क्या है?
- क्या इन पुस्तकों का सरकारी वितरण के लिए आवंटन हुआ था?
- और यदि पुस्तकों को नियमों के विरुद्ध कबाड़ी के यहां भेजा गया, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था पर सीधे आरोप लगाना उचित नहीं होगा। वीडियो की लोकेशन, पुस्तकों के स्रोत और पूरे मामले की वास्तविकता संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
नोट: यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उसमें किए जा रहे दावों के आधार पर तैयार की गई है। वीडियो की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

