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6 वर्षीय मासूम से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी चाचा को डबल मृत्युदंड, 14 महीने में पूरा हुआ ट्रायल


दुर्ग।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में छह वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मोहन नगर थाना क्षेत्र में अप्रैल 2025 में हुई इस जघन्य वारदात के आरोपी बच्ची के चाचा सोमेश यादव को अदालत ने डबल मृत्युदंड की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई महज करीब 14 महीने में पूरी हुई।

मामले में कई गवाहों के मुकर जाने के बावजूद पुलिस की वैज्ञानिक एवं तकनीकी विवेचना आरोपी के खिलाफ महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई। पुलिस ने बच्ची के लापता होने की सूचना मिलते ही बिना समय गंवाए उसकी तलाश शुरू की थी। पुलिस टीमों ने संभावित स्थानों पर तलाश के साथ तकनीकी और मैदानी सूचनाओं के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।

अपराध की क्रूरता को देखते हुए 'दुर्लभ से दुर्लभतम' मामला

चतुर्थ एफटीएससी एवं विशेष न्यायालय (पॉक्सो) के अपर सत्र न्यायाधीश अनिष दुबे ने मामले की सुनवाई करते हुए अपराध की गंभीरता, बच्ची की कम उम्र, आरोपी और पीड़िता के पारिवारिक रिश्ते तथा वारदात के बाद साक्ष्य छिपाने और दूसरे व्यक्ति को फंसाने के कथित प्रयास को गंभीरता से लिया।

अदालत ने मामले को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (रेयरेस्ट ऑफ द रेयर) श्रेणी का माना और आरोपी को कठोरतम सजा सुनाई।

इन धाराओं में दोषी ठहराया गया

अदालत ने आरोपी सोमेश यादव को पॉक्सो एक्ट की धारा 5(ड) और 5(ढ), सहपठित धारा 6(1), भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 65(2) और 238(क) के तहत दोषी पाया।

इसके बाद अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6(1), BNS की धारा 103(1) और 238(क) के तहत सजा सुनाई।

अदालत की सख्त टिप्पणी

फैसले के दौरान अदालत ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि यदि बच्चों के खिलाफ इस तरह के जघन्य अपराध बाहरी लोगों के बजाय परिवार और घर के सदस्यों द्वारा ही किए जाने लगें, तो बच्चियां आखिर सुरक्षित कहां रहेंगी।

यह फैसला न केवल अपराध की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि गवाहों के मुकरने के बावजूद वैज्ञानिक साक्ष्य, तकनीकी जांच और पुलिस की मजबूत विवेचना किसी गंभीर आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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