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हड़ताल शुरू होने के बाद भी SECL प्रबंधन की चुप्पी, 12 साल से अर्जन प्रक्रिया अटकी होने का ग्रामीणों का आरोप


गेवरा बस्ती के ग्रामीण बोले—जमीन न बेच पा रहे, न मुआवजा और रोजगार पर स्पष्टता; हैवी ब्लास्टिंग से घरों में दरारों की भी शिकायत

गेवरा बस्ती/कोरबा। गेवरा बस्ती में अपनी मांगों को लेकर ग्रामीणों की हड़ताल शुरू हो चुकी है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार हड़ताल शुरू होने के बाद भी SECL प्रबंधन की ओर से अब तक कोई सार्थक और स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर SECL प्रबंधन गेवरा बस्ती के अर्जन की प्रक्रिया को इतने वर्षों से लंबित क्यों रखे हुए है?

ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 12 वर्षों से अर्जन प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और गांव की जमीन पर स्टे की स्थिति बनी हुई है। इसके चलते प्रभावित परिवारों के सामने जमीन के उपयोग और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।


जरूरत पड़ने पर भी जमीन बेचने का रास्ता बंद होने का दावा

ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी परिवार के सामने अचानक मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, शादी, बीमारी या अन्य गंभीर आर्थिक आवश्यकता आ जाए, तो ऐसी स्थिति में भी परिवार अपनी जमीन का स्वतंत्र रूप से उपयोग या बिक्री नहीं कर पा रहा है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब जमीन के भविष्य को लेकर वर्षों से स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो प्रभावित परिवारों को आखिर किस आधार पर इतने लंबे समय तक इंतजार कराया जा रहा है?

उनका कहना है कि एक तरफ जमीन अर्जन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो रही है, दूसरी तरफ प्रभावित परिवारों को मुआवजा, रोजगार और बसाहट को लेकर भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। इससे ग्रामीणों के सामने न जमीन का पूरा उपयोग करने की स्थिति है और न ही अर्जन एवं पुनर्वास को लेकर अंतिम तस्वीर साफ है।


ग्रामीणों का सवाल—आखिर SECL चाहती क्या है?

हड़ताल के बीच ग्रामीणों ने SECL प्रबंधन से सीधा सवाल उठाया है कि यदि गेवरा बस्ती की जमीन परियोजना के लिए आवश्यक है तो अर्जन की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा क्यों नहीं किया जा रहा और यदि जमीन तत्काल अर्जित नहीं की जानी है तो ग्रामीणों को वर्षों तक अनिश्चितता में क्यों रखा जा रहा है?

ग्रामीण चाहते हैं कि SECL प्रबंधन जिला प्रशासन और संबंधित कंपनी के अधिकारियों के साथ ग्रामवासियों एवं जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में सामूहिक बैठक करे और मुआवजा, रोजगार, बसाहट तथा अर्जन की समयसीमा पर लिखित एवं स्पष्ट जवाब दे।

हैवी ब्लास्टिंग से घरों में दरारों की शिकायत

ग्रामीणों ने गेवरा खदान में होने वाली हैवी ब्लास्टिंग को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि ब्लास्टिंग के कारण कई घरों की दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं और लगातार कंपन से मकानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

गेवरा क्षेत्र में ब्लास्टिंग से घरों में दरारों की शिकायतें पहले भी सार्वजनिक रूप से सामने आ चुकी हैं। एक पर्यावरणीय जनसुनवाई के रिकॉर्ड में भी ब्लास्टिंग के कारण घरों में दरारें आने संबंधी मुद्दा दर्ज है। हालिया रिपोर्टों में भी गेवरा क्षेत्र के निवासियों द्वारा ब्लास्टिंग से मकानों में दरारों की शिकायत का उल्लेख किया गया है।

ग्रामीणों की मांग है कि ब्लास्टिंग से प्रभावित मकानों का स्वतंत्र तकनीकी सर्वेक्षण कराया जाए और यदि ब्लास्टिंग से नुकसान की पुष्टि होती है तो नियमानुसार उचित कार्रवाई एवं मुआवजे की व्यवस्था की जाए।

7 सूत्रीय मांगों पर भी जवाब का इंतजार

ग्रामीणों ने इससे पहले SECL प्रबंधन, जिला प्रशासन और संबंधित कंपनियों के सामने सात प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सामूहिक बैठक, गेवरा बस्ती के भू-अधिग्रहण पर चर्चा, मुआवजा पत्रक जारी करना, रोजगार में स्थानीय प्रभावितों को प्राथमिकता, प्रभावित कर्मचारियों के हितों की रक्षा, HPC दर पर वेतन तथा सड़क-बिजली-पानी-चिकित्सा-शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग शामिल है।

अब सवाल यह है कि हड़ताल शुरू होने के बाद SECL प्रबंधन ग्रामीणों के साथ बातचीत के लिए कब आगे आता है और वर्षों से लंबित बताए जा रहे अर्जन, मुआवजा, रोजगार एवं पुनर्वास के मुद्दों पर क्या ठोस समयसीमा तय की जाती है।

नोट: अर्जन प्रक्रिया, कथित स्टे, जमीन की बिक्री पर प्रभाव और ब्लास्टिंग से मकानों में आई दरारों संबंधी दावे ग्रामीणों द्वारा उठाए गए मुद्दों के आधार पर हैं। संबंधित SECL प्रबंधन का पक्ष/आधिकारिक जवाब प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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