जांजगीर-चांपा। शिक्षिका निर्मला कोमल लहरे के निलंबन के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर शासकीय नियमों और विभागीय निर्देशों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में शिक्षिका के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। हालांकि, अब चर्चा सिर्फ एक शिक्षिका के निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि विभागीय निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि शिक्षकों द्वारा सोशल मीडिया पर रील, वीडियो और अन्य पोस्ट के माध्यम से विभागीय नियमों की अनदेखी किए जाने के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में अक्सर सोशल मीडिया पर मामला चर्चा में आने या वायरल होने के बाद ही विभागीय स्तर पर कार्रवाई होती दिखाई देती है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग की निगरानी व्यवस्था केवल शिकायत या मामला वायरल होने के बाद कार्रवाई तक सीमित रह गई है? संकुल स्तर से लेकर विकासखंड और जिला स्तर तक शिक्षकों के आचरण एवं सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
शिक्षिका निर्मला कोमल लहरे के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद अब यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि विभागीय नियमों के उल्लंघन की शिकायतें पहले से सामने आती रही हैं, तो समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
विभाग की ओर से निलंबन जैसी कार्रवाई निश्चित रूप से अनुशासन कायम रखने का संदेश देती है, लेकिन क्या केवल निलंबन से समस्या का स्थायी समाधान संभव है? जानकारों का मानना है कि विभाग को शिक्षकों के लिए स्पष्ट सोशल मीडिया आचार संहिता, नियमित निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
फिलहाल शिक्षिका के निलंबन की कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवालों पर विभाग की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।


