कुसमुण्डा / कोरबा (CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)
नीलकंठ साकार (JV) कंपनी में ठेका प्रबंधन के तहत कार्यरत सिक्योरिटी गार्डों की स्थिति बेहत खराब बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार लेबर कानून के तहत जहां 8 घंटे की ड्यूटी अनिवार्य है, वहीं कंपनी सिक्योरिटी गार्डों से 12 से 14 घंटे तक काम करा रही है, वह भी बिना ओवरटाइम भुगतान के।
न्यूनतम वेतन नियम की खुली अवहेलना
कंपनी द्वारा गार्डों को मात्र ₹12,000 मासिक वेतन दिया जा रहा है, जबकि केंद्रीय सरकार के नवीनतम वेतन निर्देशानुसार (1 अप्रैल 2025 से लागू) कुशल सिक्योरिटी गार्ड का न्यूनतम वेतन ₹27,690 प्रति माह निर्धारित है। इसके बावजूद कंपनी द्वारा वेतन में भारी कटौती कर गार्डों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
मेडिकल, BTC ट्रेनिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी
सिक्योरिटी गार्डों को कंपनी द्वारा न तो मेडिकल कराया गया है और न ही खदान (माइनिंग) में ड्यूटी से पहले अनिवार्य BTC ट्रेनिंग दी गई है, जो कि सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। साथ ही किसी भी गार्ड को ID कार्ड जारी नहीं किया गया, जो पूर्णतः नियम विरुद्ध है।
बिना BTC ट्रेनिंग के यदि माइनिंग क्षेत्र में हादसा होता है और किसी श्रमिक की मौत होती है तो —
उत्तरदायी मुख्य रूप से ठेका प्रदाता कंपनी व नियोक्ता होंगे।
इस स्थिति में निम्न कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है —
संभावित दंडनीय धाराएँ
| उल्लंघन | लागू कानून / धारा |
|---|---|
| श्रमिकों से 8 घंटे से अधिक कार्य | श्रम संहिता — वेतन संहिता 2019 व औद्योगिक संबंध संहिता 2020 |
| ओवरटाइम वेतन न देना | न्यूनतम वेतन अधिनियम, बोनस अधिनियम |
| BTC ट्रेनिंग के बिना कर्मियों को माइनिंग क्षेत्र में ड्यूटी | खान सुरक्षा नियम / DGMS गाइडलाइन |
| मेडिकल न कराना, सुरक्षा मानकों की अवहेलना | व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य व कार्य परिस्थितियाँ संहिता 2020 |
| हादसे में मौत होने पर | IPC / BNS की धारा — 105 (लापरवाही से मृत्यु), 111 (मानव जीवन को ख़तरे में डालना), BNS 88/89 (सुरक्षा प्रावधानों का उल्लंघन) |
जांच में हेराफेरी के भी गंभीर आरोप
सूत्रों के अनुसार जब SECL से जांच टीम आती है तो नीलकंठ कंपनी को पहले ही सूचना दे दी जाती है। आरोप है कि जांच के दौरान —
✔︎ सिक्योरिटी गार्डों से मिलने नहीं दिया जाता
✔︎ केवल कागजी औपचारिकता कर खानापूर्ति की जाती है
✔︎ गार्डों को चेतावनी दी जाती है कि “8 घंटे ड्यूटी” और “अधिक वेतन” की जानकारी देना
गार्डों का कहना है कि कंपनी अधिकारी उनके साथ अभद्र भाषा में बात करते हैं और नौकरी से निकालने की धमकी देते रहते हैं।
मजदूर वर्ग में बढ़ रहा आक्रोश — कार्रवाई और जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद गार्डों में रोष बढ़ रहा है। श्रमिक संगठनों ने जल्द ही —
🔹 मजदूर कल्याण विभाग
🔹 जिला श्रम पदाधिकारी
🔹 DGMS
🔹 SECL प्रबंधन
से कार्रवाई की मांग करने की तैयारी शुरू कर दी है।
CG ई खबर इस मामले पर निरंतर निगरानी बनाए हुए है।
यदि किसी भी श्रमिक के साथ अन्याय हुआ है या जीवन सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया है, तो संबंधित विभाग व न्यायालय के स्तर पर बड़ा मामला खड़ा होना तय माना जा रहा है।


