कटघोरा/कोरबा। एसईसीएल कोरबा प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनी टीएमसी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ ग्राम लालपुर और भेजीनारा के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने पूर्व में तय 8 सूत्रीय लिखित सहमति से कथित तौर पर पीछे हटने और प्रशासन को गलत जानकारी देकर एसडीएम कटघोरा के माध्यम से नोटिस जारी कराने का आरोप लगाते हुए विवादित स्थल पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।
भारी बारिश के बावजूद ग्रामीण आंदोलन स्थल पर डटे रहे। ग्रामीणों के मुताबिक, उनके अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर स्कूली बच्चे भी प्रदर्शन में शामिल हुए। ग्रामीणों ने कटघोरा विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने तथा समस्याओं का समाधान कराने की अपील की है।
1987 में जमीन अधिग्रहण का ग्रामीणों का दावा
ग्रामीणों का आरोप है कि लालपुर और भेजीनारा क्षेत्र में 70 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासी समुदाय की है। वर्ष 1987 में सिंघाली खदान के लिए ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। ग्रामीणों के अनुसार, उस दौरान रोजगार और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर किसानों से भू-राजस्व पर्चियां ले ली गई थीं, जो अब तक वापस नहीं की गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मूल पर्चियां उपलब्ध नहीं होने के कारण कई आदिवासी परिवारों के बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने में परेशानी आ रही है। इससे उनके उच्च शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी बाधा उत्पन्न होने का दावा किया गया है।
ग्रामीणों की 8 प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने एसईसीएल और प्रशासन के समक्ष आठ सूत्रीय मांगें रखी हैं—
- सिंघाली खदान में 275 ग्रामीणों को दिए गए रोजगार और मुआवजे की संपूर्ण लिखित जानकारी सार्वजनिक की जाए।
- लालपुर और भेजीनारा को जोड़ने वाले पुराने मुख्य मार्ग को व्यवस्थित रूप से बहाल किया जाए।
- निस्तारी के लिए उपयोग किए जाने वाले सार्वजनिक तालाब को पाटे जाने की प्रक्रिया और अनुमति की आधिकारिक जानकारी दी जाए।
- लालपुर और भेजीनारा में स्थायी एवं शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- स्थानीय भू-विस्थापितों को टीएमसी प्राइवेट लिमिटेड में प्राथमिकता के आधार पर वैकल्पिक रोजगार दिया जाए।
- खसरा नंबर 217/16क, 217/16ख और 217/16ग की निजी जमीन पर कथित कब्जे और बनाए गए रास्ते की जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- ग्रामीणों द्वारा लगाए गए मुक्तिधाम ध्वस्तीकरण के आरोप की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- वर्ष 1987 से रोकी गई किसानों की मूल भू-राजस्व पर्चियां वापस की जाएं और अर्जित भूमि के रिकॉर्ड को दुरुस्त किया जाए।
प्रशासन और विधायक से मौके पर पहुंचने की मांग
ग्रामीणों के अनुसार, समाचार लिखे जाने तक विवादित स्थल पर शासन या प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था। ग्रामीणों ने कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों से स्वयं मौके पर पहुंचकर जमीनी स्थिति का निरीक्षण करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा।


