पामगढ़/जांजगीर-चांपा। पामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसा में युवक अमित कुमार भंडारी (सतनामी) की मौत का मामला अब पुलिस की जांच पर ही सवाल खड़े कर रहा है। 29 जून 2026 को कोसा गांव में अमित का शव मिलने के बाद शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सीने पर चोट के निशान सामने आए थे। इसके बाद मूलमुला थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की थी।
लेकिन घटना के करीब दो महीने बाद भी परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर अमित की हत्या करने वाले कौन हैं और पुलिस उन तक क्यों नहीं पहुंच पाई?
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आए आरोपों में मृतक के परिजनों ने पुलिस की पूछताछ और जांच प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। आरोप है कि संदिग्धों और उनके परिजनों से पूछताछ करने के बजाय मृतक के भाई-भाभी तथा उनके परिवार के सदस्यों को थाने बुलाकर दबाव बनाया गया और हत्या कबूल कराने का प्रयास किया गया।
परिजनों की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि घटनास्थल से मिले शव और चप्पल को खोजी कुत्ते ने ट्रैक किया और कथित तौर पर मृतक की प्रेमिका के घर तक पहुंचा। हालांकि, इस दावे की अभी तक पुलिस या किसी स्वतंत्र आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हो सकी है।
मूलमुला पुलिस से सीधे सवाल
अमित की मौत के मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पुलिस ने हत्या का अपराध दर्ज कर लिया था, तो जांच आखिर किस दिशा में आगे बढ़ी?
क्या घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच हुई?
क्या डॉग स्क्वायड की ट्रैकिंग रिपोर्ट को जांच का हिस्सा बनाया गया?
क्या मृतक के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और आखिरी लोकेशन की जांच हुई?
मृतक की प्रेमिका सहित उन सभी संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ हुई या नहीं, जिनका नाम परिजन और स्थानीय लोग ले रहे हैं?
अगर पुलिस को पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं तो अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—क्या पुलिस ने मृतक के परिवार के सदस्यों से पूछताछ के दौरान किसी प्रकार का दबाव या दुर्व्यवहार किया?
इन सवालों का जवाब मूलमुला थाना पुलिस और जांच अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए, ताकि मृतक के परिवार के साथ-साथ आम लोगों का भी पुलिस जांच पर विश्वास बना रहे।
परिजन बोले—अमित को न्याय चाहिए
मृतक के परिजन और समर्थक लगातार अमित को न्याय दिलाने तथा हत्या के वास्तविक आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और किसी निर्दोष व्यक्ति को प्रताड़ित करने के बजाय वास्तविक हत्यारों तक पुलिस को पहुंचना चाहिए।
मूलमुला पुलिस की जांच पर निगाहें
अमित हत्याकांड में पुलिस ने हत्या का अपराध दर्ज किया है, लेकिन अब तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी की स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आती। यही वजह है कि मूलमुला थाना पुलिस की जांच की गति और दिशा पर सवाल लगातार बढ़ रहे हैं।
यदि पुलिस के पास ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें जांच आगे बढ़ाकर दोषियों तक पहुंचना होगा। वहीं यदि परिजनों द्वारा लगाए गए पुलिस पर दबाव और दुर्व्यवहार के आरोप गलत हैं, तो पुलिस को भी अपना पक्ष और जांच की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
अमित को न्याय कब मिलेगा?
हत्यारे कब गिरफ्तार होंगे?
और मूलमुला पुलिस इन सवालों का जवाब कब देगी?
इन सवालों के जवाब अब जांच से जुड़े अधिकारियों से अपेक्षित हैं।
CG ई खबर की ओर से संबंधित पुलिस अधिकारियों से अपील है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्य सार्वजनिक किए जाएं और यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान किया गया है तो उसकी भी जांच हो।


