मासोड़ी गांव के आसपास मिले टाइगर के पंजों के निशान, 4–5 साल के बाघ होने का अनुमान; ग्रामीणों को जंगल में अकेले न जाने की सलाह
दंतेवाड़ा। जिले के बचेली वन परिक्षेत्र अंतर्गत मासोड़ी गांव के आसपास जंगल में बाघ की मौजूदगी के संकेत मिलने से वन विभाग सतर्क हो गया है। जंगल में टाइगर के पंजों के निशान मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और निशानों की जांच शुरू की। शुरुआती आकलन में इन निशानों को करीब 4 से 5 वर्ष उम्र के बाघ से जोड़कर देखा जा रहा है।
बाघ की मौजूदगी की सूचना मिलते ही DFO सहित बचेली वन परिक्षेत्र के रेंजर डॉ. प्रीतेश पांडेय मौके पर पहुंचे। वन अमला लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रहा है और ग्रामीणों को आवश्यक सावधानियां बरतने की समझाइश दी जा रही है।
सुबह-शाम विशेष सावधानी की अपील
वन विभाग ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि वे अनावश्यक रूप से जंगल या जंगल से लगे क्षेत्रों में अकेले न जाएं। खासकर सुबह और शाम के समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने तथा बच्चों को अकेले बाहर न भेजने की अपील की गई है।
ग्रामीणों से मवेशियों को खुले में नहीं छोड़ने और उन्हें सुरक्षित बाड़े में रखने को कहा गया है। रात में घर से बाहर निकलने की आवश्यकता होने पर टॉर्च का इस्तेमाल करने और संभव हो तो समूह में जाने की सलाह दी गई है।
बाघ दिखे तो न पीछा करें, न घेरें
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को बाघ या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई देता है तो उसके पास जाने, उसका पीछा करने, घेरने या भगाने की कोशिश न करें। तत्काल इसकी सूचना नजदीकी वन अमले अथवा बचेली वन परिक्षेत्र कार्यालय को दें।
विभाग ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से बचने और वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है।
बाघ को सुरक्षित जंगल की ओर भेजने की कोशिश
रेंजर डॉ. रितेश पांडेय के मुताबिक, वन विभाग की प्राथमिकता बाघ को परेशान करना नहीं, बल्कि उसकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए उसे सुरक्षित रूप से घने जंगल की ओर जाने देना है। टीम क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही है और ग्रामीणों को वन्यजीव की गतिविधियों को लेकर जागरूक किया जा रहा है।
मासोड़ी क्षेत्र में मिले पंजों के निशानों की जांच जारी है। बाघ की वास्तविक गतिविधि और उसके आवागमन की दिशा को लेकर निगरानी के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
बीजापुर के जंगलों से आने की संभावना
स्थानीय जानकारी और वन्यजीव विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार बाघ के बीजापुर की दिशा से दंतेवाड़ा पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। क्षेत्र के जंगल बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व से जुड़े हुए हैं, जिससे वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही बनी रहती है।
हालांकि मासोड़ी में मिले पंजों के निशान वाला बाघ वास्तव में किस क्षेत्र से आया है, इसकी पुष्टि वन विभाग की आगे की निगरानी और जांच के बाद ही हो सकेगी।
पहले भी सामने आती रही है बाघ की मौजूदगी
दंतेवाड़ा-बचेली क्षेत्र के जंगलों में पहले भी बाघों की मौजूदगी की जानकारी सामने आती रही है। स्थानीय स्तर पर पूर्व में बाघों के शिकार के दावे भी किए जाते रहे हैं। ऐसे में नए पंजों के निशान मिलने के बाद वन विभाग के सामने बाघ की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती भी है।
फिलहाल वन अमला बाघ की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। विभाग की कोशिश है कि बाघ आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश न करे और सुरक्षित रूप से जंगल के भीतर चला जाए। ग्रामीणों से भी सतर्क रहने तथा किसी भी वन्यजीव गतिविधि की जानकारी तत्काल वन विभाग को देने की अपील की गई है।



