रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर 16 सितंबर से अनिश्चितकालीन घेराव और तालाबंदी की चेतावनी
कुसमुंडा/गेवरा बस्ती। गेवरा बस्ती के भू-विस्थापित परिवारों की रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़ी मांगों को लेकर मामला अब आंदोलन की ओर बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि 4 सितंबर 2026 को SECL कुसमुंडा प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर KNR कंपनी में स्थानीय भू-विस्थापित युवाओं को रोजगार देने तथा त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित करने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक जवाब या पहल नहीं की गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 2014 में भूमि अधिग्रहण के बाद भी प्रभावित परिवारों के कई मुद्दे लंबित हैं। वर्तमान में SECL कुसमुंडा क्षेत्र में KNR कंपनी में रोजगार के अवसर होने का हवाला देते हुए स्थानीय पात्र एवं शिक्षित बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग की जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि SECL प्रबंधन, KNR कंपनी प्रबंधन और गेवरा बस्ती के भू-विस्थापित परिवारों एवं जनप्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय बैठक आयोजित कर रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े लंबित मामलों पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। जब तक स्थायी रोजगार और अन्य लंबित लाभ नहीं मिलते, तब तक KNR कंपनी में अस्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने KNR कंपनी में बाहरी लोगों की भर्ती किए जाने का दावा करते हुए स्थानीय भू-विस्थापितों को प्राथमिकता देने की मांग की थी। हालांकि यह ग्रामीणों द्वारा लगाया गया आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
16 सितंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान
ग्रामीणों का कहना है कि 4 सितंबर के ज्ञापन के बाद भी कोई जवाब नहीं मिलने के कारण अब आंदोलन का निर्णय लिया गया है। 16 सितंबर 2026, बुधवार से SECL कुसमुंडा क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय एवं खदान के घेराव तथा तालाबंदी का ऐलान किया गया है।
ग्रामीणों ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताते हुए कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी SECL प्रबंधन एवं संबंधित प्रशासन की होगी—ऐसा ग्रामीणों ने अपने पत्र में कहा है।
इस आंदोलन में वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद राजकुमार कंवर, वार्ड 26 के पार्षद प्यारेलाल दिवाकर, वार्ड 27 के पार्षद इंद्रजीत बिंझवार और वार्ड 28 के पार्षद श्रवण यादव सहित ग्रामीण प्रतिनिधियों की भूमिका बताई गई है।
अब देखना होगा कि 16 सितंबर से प्रस्तावित तालाबंदी से पहले SECL कुसमुंडा प्रबंधन ग्रामीणों की मांगों पर कोई पहल करता है या नहीं।




