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प्रचार-प्रसार की कमी या जागरूकता का अभाव? महिला थाना में 6 माह में महज 22 केस, महिला परामर्श केंद्र में 333 प्रकरण


(CG ई खबर | दर्री ब्लॉक रिपोर्टर : सरस्वती मरकाम)

कोरबा। महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने और महिला अपराधों पर त्वरित कार्रवाई के उद्देश्य से करीब छह माह पहले रामपुर सिविल लाइन थाना परिसर में महिला थाना शुरू किया गया था। उम्मीद थी कि अलग थाना मिलने से महिलाएं अपनी शिकायतें बेझिझक पुलिस तक पहुंचा सकेंगी। लेकिन छह महीने बाद सामने आए आंकड़े कई सवाल खड़े कर रहे हैं।

महिला थाना में अब तक महज 22 प्रकरण दर्ज हुए हैं। वहीं दूसरी ओर महिला परामर्श केंद्र में जनवरी से अब तक 333 प्रकरण पहुंच चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक महिला थाना में औसतन हर महीने करीब चार मामले दर्ज हुए, जबकि परामर्श केंद्र में हर महीने 40 से अधिक मामले पहुंचे।

333 मामलों में पारिवारिक विवादों की बड़ी संख्या

महिला परामर्श केंद्र में पहुंचने वाले मामलों में बड़ी संख्या पति-पत्नी के विवाद, घरेलू कलह और पारिवारिक मतभेद से संबंधित है। ऐसे मामलों में पुलिस और परामर्शदाता दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत और समझाइश के माध्यम से विवाद सुलझाने का प्रयास करते हैं। कई मामलों में समझाइश के बाद परिवार टूटने से भी बच जाते हैं।

वहीं गंभीर अपराधों की स्थिति में महिला थाना में कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की जाती है। ऐसे में दोनों संस्थाओं के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि महिलाओं से जुड़े कई विवाद सीधे आपराधिक मुकदमे तक नहीं पहुंचते और पहले समझौते या परामर्श के स्तर पर ही सुलझाने का प्रयास किया जाता है।

छह महीने में 22 केस, उठ रहे सवाल

महिला थाना शुरू होने के बावजूद छह महीने में केवल 22 प्रकरण दर्ज होना पुलिस और प्रशासन के लिए विचार का विषय है। सवाल यह है कि क्या जिले में महिलाओं के खिलाफ अपराध वास्तव में इतने कम हैं? या फिर महिलाएं अभी भी महिला थाना तक अपनी शिकायत लेकर पहुंचने में संकोच कर रही हैं?

क्या महिला थाना के बारे में पर्याप्त प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया? ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को महिला थाना की सेवाओं और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी कितनी है? इन सवालों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

महिला अपराधों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए केवल एफआईआर के आंकड़ों को देखना पर्याप्त नहीं होगा। परामर्श केंद्र में पहुंच रहे मामलों, महिला हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों को भी समग्र रूप से देखना जरूरी है।

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