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राताखार कबाड़ यार्ड में सरकारी स्ट्रीट लाइट के खंभे खरीदने का आरोप, जिलाबदर के बावजूद गतिविधियों पर उठे सवाल


कोरबा।
राताखार क्षेत्र स्थित एक कबाड़ यार्ड में सरकारी स्ट्रीट लाइट के खंभे खरीदे जाने के आरोप ने प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, 11 सितंबर 2026 की सुबह करीब 9:30 से 10 बजे के बीच उक्त कबाड़ यार्ड में सरकारी स्ट्रीट लाइट के खंभे लाकर खरीदे जाने की बात सामने आई है।

शिकायत में कबाड़ कारोबारी मुकेश साहू का नाम सामने आया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि मुकेश साहू के खिलाफ पूर्व में सरकारी पुल की सामग्री चोरी से जुड़े मामले में जेल जाने की बात भी सामने आ चुकी है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

जिलाबदर के बाद भी गतिविधियों का आरोप

मामले में सबसे गंभीर सवाल यह उठाया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई होने के बावजूद कथित रूप से कबाड़ कारोबार से जुड़ी गतिविधियां कैसे जारी रहीं। शिकायतकर्ता के अनुसार, जिलाबदर की कार्रवाई के अगले ही दिन सरकारी स्ट्रीट लाइट के खंभों की कथित खरीद का मामला सामने आया है।

शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि शहर में लगे सरकारी स्ट्रीट लाइट के खंभों को चोरी करवाकर कबाड़ के रूप में खरीदा जा रहा हो सकता है। हालांकि, यह फिलहाल एक आशंका और आरोप है, जिसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

CCTV और खरीद-बिक्री रिकॉर्ड की जांच की मांग

मामले में प्रशासन और पुलिस से कबाड़ यार्ड की तत्काल जांच करने की मांग की जा रही है। साथ ही यार्ड में मौजूद लोहे एवं अन्य सामग्री की जांच, सरकारी स्ट्रीट लाइट के खंभों की पहचान, CCTV फुटेज, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल किए जाने की मांग उठी है।

यदि जांच में सरकारी संपत्ति की चोरी या अवैध खरीद-फरोख्त की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो वास्तविक स्थिति भी जांच के माध्यम से स्पष्ट हो जाएगी।

फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन और पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कबाड़ यार्ड में पहुंचे स्ट्रीट लाइट के खंभे कहां से आए और उनकी खरीद वैध थी या नहीं।

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